Chuteshwar Nath Mahadev Mandir
Chuteshwar Nath Mahadev Mandir: चुटेश्वरनाथ महादेव शिव मंदिर एक अत्यंत प्राचीन एवं दिव्य शिव धाम है, जिसकी मान्यता हजारों वर्षों पुरानी बताई जाती है। यह मंदिर अपने स्वयंभू शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है, जिसे भगवान शंकर का स्वयं प्रकट स्वरूप माना जाता है। यह धाम न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि अपने रहस्यमय इतिहास और चमत्कारों के कारण भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष स्थान रखता है।
घने जंगलों से श्रद्धा के केंद्र तक का सफर
आज जहाँ हजारों भक्तों की भीड़ दिखाई देती है, वहीं करीब 50 वर्ष पहले यह क्षेत्र घने और विराट जंगलों से घिरा हुआ था। उस समय स्थिति ऐसी थी कि लोग दिन के उजाले में भी यहाँ आने से डरते थे। आसपास सन्नाटा और भय का वातावरण रहता था। मंदिर के समीप कभी ‘चूटी’ नामक एक गाँव बसा हुआ था, जो अब पूरी तरह विरान हो चुका है। समय के साथ गाँव उजड़ गया, लेकिन बाबा चुटेश्वरनाथ की महिमा और आस्था दिन-ब-दिन बढ़ती चली गई।
चूटी पुल और ऐतिहासिक महत्व
इस क्षेत्र में अंग्रेजों के शासनकाल में निर्मित एक पुल आज भी मौजूद है, जिसे ‘चूटी पुल’ के नाम से जाना जाता है। यह पुल इस स्थान के ऐतिहासिक महत्व को दर्शाता है और बताता है कि यह क्षेत्र केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहा है। आज का चुटेश्वरनाथ धाम वर्तमान समय में चुटेश्वरनाथ महादेव मंदिर श्रद्धा का विशाल केंद्र बन चुका है। यहाँ प्रतिदिन और विशेष रूप से सावन, महाशिवरात्रि और सोमवार के दिनों में हजारों की संख्या में भक्त दर्शन के लिए आते हैं। दूर-दराज़ के क्षेत्रों से श्रद्धालु बाबा के दर्शन हेतु इस पावन धाम में पहुंचते हैं।
दुःख और संकटों के निवारण की आस्था
भक्तों की गहरी मान्यता है कि चुटेश्वरनाथ महादेव के दरबार में सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य फल देती है। लोग अपने दुःख, संकट, रोग, मानसिक तनाव और जीवन की अनेक समस्याओं के समाधान के लिए यहाँ आते हैं। श्रद्धालु शिवलिंग पर बेलपत्र, जल और भस्म अर्पित कर बाबा से कृपा की कामना करते हैं।
निष्कर्ष
चुटेश्वरनाथ महादेव शिव मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और चमत्कारों का जीवंत प्रतीक है। जंगलों और वीराने से निकलकर आज यह धाम लाखों श्रद्धालुओं के विश्वास का केंद्र बन चुका है। जो भी भक्त सच्ची श्रद्धा के साथ यहाँ आता है, वह खाली हाथ नहीं लौटता—यही इस पावन धाम की सबसे बड़ी पहचान है।
॥ ॐ नमः शिवाय ॥